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Three Language Policy 2026: कक्षा 6 के छात्रों को मिल सकती है राहत? सुप्रीम कोर्ट ने CBSE से मांगा जवाब

CBSE Three Language Policy 2026 और कक्षा 6 के छात्रों पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई

Three Language Policy 2026: CBSE की तीन भाषा नीति को लेकर स्कूलों, अभिभावकों और छात्रों के बीच बनी उलझन अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुकी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत इस सत्र से कक्षा 6 में तीसरी भाषा अनिवार्य कर दी गई थी, लेकिन स्कूलों में शिक्षकों और पाठ्य सामग्री की कमी को लेकर लगातार सवाल उठते रहे। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने CBSE और केंद्र सरकार से इस पर जवाब मांगा है, साथ ही मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों को राहत देने पर विचार करने को भी कहा है। मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर 2026 को होगी। जानिए कोर्ट में क्या हुआ और आगे क्या हो सकता है।

मुख्य खबर क्या है

CBSE की तीन भाषा नीति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि तीसरी भाषा पढ़ाने में कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन इसे लागू करने के तरीके पर सवाल जरूर हैं। कोर्ट ने CBSE से पूछा कि क्या देशभर के स्कूलों में इतनी नई भाषाएं पढ़ाने लायक शिक्षक और सामग्री मौजूद है, खासकर उन भाषाओं की जो बच्चों ने पहले कभी नहीं पढ़ी।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर ने कहा कि पंजाबी या तमिल जैसी भाषा को अचानक पढ़ना मुश्किल है, जब बुनियादी वर्णमाला जैसी सामग्री भी उपलब्ध नहीं है। इसी आधार पर कोर्ट ने पूरी नीति की समीक्षा करने का सुझाव दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

कोर्ट ने CBSE और केंद्र सरकार से कहा कि नीति लागू करने से पहले स्कूलों में शिक्षकों, किताबों और अध्ययन सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित होनी चाहिए। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी सुझाव दिया कि अगर कक्षा 6 को ही तीसरी भाषा की शुरुआत का बिंदु माना जाना है, तो मौजूदा सत्र में पढ़ रहे कक्षा 6 के छात्रों को इस बार के लिए एकमुश्त छूट दी जा सकती है, और नई व्यवस्था अगले शैक्षणिक सत्र से लागू हो। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि संबंधित प्राधिकरण इस सुझाव पर विचार कर अपना जवाब पेश करेंगे।

कोर्ट ने एक और दिलचस्प बिंदु उठाया – अंग्रेजी को “गैर-भारतीय” भाषा मानने पर सवाल। न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने कहा कि “नेटिव” शब्द का औपनिवेशिक अर्थ है और भारतीय समाज में अंग्रेजी की जड़ें काफी पुरानी हैं, इसलिए यह तय करना जरूरी है कि संवैधानिक नजरिए से अंग्रेजी को भारतीय भाषा माना जाए या नहीं। कोर्ट के अनुसार इस सवाल का जवाब मिलने से नीति की कई उलझनें अपने आप सुलझ सकती हैं।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि कोर्ट ने अभी सिर्फ CBSE से इस पर विचार करने को कहा है, यह अंतिम फैसला नहीं है। आधिकारिक स्थिति 17 सितंबर की सुनवाई के बाद ही साफ होगी।

छात्रों और अभिभावकों के लिए इसका क्या मतलब है

अभी कक्षा 6 के छात्रों के लिए तीसरी भाषा (R3) की पढ़ाई जारी रखनी होगी, क्योंकि CBSE की ओर से अभी कोई आधिकारिक छूट जारी नहीं हुई है। अगर CBSE कोर्ट के सुझाव को स्वीकार करता है, तो मौजूदा बैच को इस साल के लिए राहत मिल सकती है और नई व्यवस्था अगले सत्र से शुरू होने वाले बैच पर लागू होगी। अभिभावकों को सलाह है कि सोशल मीडिया पर चल रहे किसी भी अपुष्ट दावे पर भरोसा न करें और CBSE की आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार करें।

Three Language Policy क्या है

NEP 2020 के त्रि-भाषा फॉर्मूले के तहत हर छात्र को तीन भाषाएं पढ़नी होती हैं, जिनमें कम-से-कम दो भारतीय भाषाएं शामिल होनी चाहिए। यह नियम सरकारी और निजी, दोनों तरह के स्कूलों पर लागू होता है, और राज्यों को अपनी भाषाएं चुनने की छूट दी गई है। CBSE स्कूलों में यह ढांचा राज्य बोर्ड से काफी अलग तरीके से लागू होता है, इसलिए जो अभिभावक दोनों में अंतर समझना चाहते हैं, वे CBSE और State Board में क्या अंतर है पढ़ सकते हैं।

R1, R2 और R3 क्या हैं

CBSE ने इसे लागू करने के लिए भाषाओं को तीन स्तरों में बांटा है।

स्तरमतलबविवरण
R1पहली भाषाछात्र की मुख्य भाषा या मातृभाषा
R2दूसरी भाषाअलग भाषा, आमतौर पर हिंदी या अंग्रेजी
R3तीसरी भाषाकक्षा 6 से अनिवार्य, इनमें कम-से-कम दो भारतीय भाषाएं जरूरी

भारतीय भाषाओं की सूची में हिंदी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, मराठी, बंगाली, पंजाबी, गुजराती, ओडिया और असमिया जैसी भाषाएं आती हैं, जबकि अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, अरबी और स्पेनिश को गैर-भारतीय भाषाओं में रखा गया है। CBSE ने अप्रैल 2026 में स्कूलों को सात दिन के भीतर R3 ढांचा लागू करने का निर्देश भी दिया था, और कहा था कि जब तक NCFSE-आधारित किताबें तैयार नहीं होतीं, स्कूल स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्री से पढ़ाई शुरू करें।

29 जून 2026 के दिशानिर्देशों में CBSE ने कक्षा 7, 8 और 9 के उन छात्रों को पहले ही राहत दी थी जो दो गैर-भारतीय भाषाएं पढ़ रहे थे उन्हें अपना मौजूदा संयोजन बरकरार रखने और सिर्फ एक भारतीय भाषा जोड़ने की छूट मिली, जिसका मूल्यांकन स्कूल स्तर पर होगा, कक्षा 10 के बोर्ड पेपर में नहीं। लेकिन 2026-27 में कक्षा 6 में दाखिल होने वाले छात्रों पर नीति पूरी तरह लागू होनी थी, और यही वर्ग अब राहत की उम्मीद कर रहा है। जिन छात्रों को आगे चलकर कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करना है, उनके लिए कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा में 90%+ स्कोर कैसे करें वाला गाइड भी काम आ सकता है।

CBSE Schools पर इसका क्या असर होगा

लोकसभा की प्राक्कलन समिति ने अपनी दसवीं रिपोर्ट में इस नीति के क्रियान्वयन पर कई खामियां बताई हैं। समिति के अनुसार स्कूलों को भाषा शिक्षकों की भर्ती, किताबों की उपलब्धता और भाषा चयन को लेकर पर्याप्त समय नहीं मिला, जिससे छात्रों और शिक्षकों, दोनों पर दबाव बना। समिति ने सुझाव दिया कि पाठ्यपुस्तकों का क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद जल्द पूरा किया जाए और राज्यों को शिक्षक भर्ती में सहयोग मिले।

नीति को लेकर राजनीतिक असहमति भी बनी हुई है। तमिलनाडु ने अपनी द्विभाषा नीति पर कायम रहने का फैसला किया है और इसके लिए केंद्र से मिलने वाली करीब 3,458 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता भी नहीं ली। राज्य के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन का कहना है कि यह नीति बिना पर्याप्त तैयारी के लागू की गई और इससे गैर-हिंदी भाषी राज्यों के छात्रों को आगे चलकर नुकसान हो सकता है।

सीकर सहित राजस्थान के CBSE स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों पर भी यह बदलाव लागू होता है, इसलिए स्कूलों को समय रहते शिक्षकों और अध्ययन सामग्री की व्यवस्था करनी होगी। एडमिशन से पहले स्कूल चुनने वाले अभिभावक सीकर के टॉप 5 CBSE स्कूल 2026-27 वाली लिस्ट देखकर रैंकिंग, फीस और एडमिशन डिटेल की तुलना कर सकते हैं।

स्कूली शिक्षा और आगे की तैयारी पर असर

कक्षा 6 से 10 तक की पढ़ाई छात्रों की आगे की एकेडमिक नींव तैयार करती है। जो छात्र आगे चलकर JEE या NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना चाहते हैं, उनके लिए स्कूल के टाइमटेबल में एक अतिरिक्त भाषा विषय जुड़ने से पढ़ाई का बोझ थोड़ा बढ़ सकता है, खासकर अगर स्कूल में उस भाषा के लिए अलग से समय और संसाधन न हों। हालांकि अभी तक किसी आधिकारिक स्रोत ने यह नहीं बताया है कि इस नीति का JEE या NEET के सिलेबस या पैटर्न पर सीधा असर पड़ेगा। भाषा को लेकर जो छात्र JEE Main में भी असमंजस में रहते हैं, वे JEE Main का पेपर हिंदी में होता है या नहीं, यह जानकारी भी देख सकते हैं।

आगे क्या होगा

फिलहाल मामला अंतिम नतीजे तक नहीं पहुंचा है। सुप्रीम कोर्ट ने CBSE को सिर्फ सुझाव दिया है कि वह कक्षा 6 के छात्रों को राहत देने पर विचार करे, इसे अभी आदेश नहीं माना जा सकता। केंद्र सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया है कि इस पर जवाब तैयार किया जाएगा। अगली सुनवाई 17 सितंबर 2026 को होगी, जिसके बाद ही स्थिति साफ होगी। तब तक छात्रों और अभिभावकों को CBSE की आधिकारिक वेबसाइट और अधिसूचनाओं पर ही भरोसा करना चाहिए।

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