JEE (जॉइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन) इंजीनियरिंग में प्रवेश के लिए भारत की दो-चरणीय प्रवेश परीक्षा प्रणाली है, जिसमें JEE Main पहला चरण और JEE Advanced दूसरा व अंतिम चरण है। ये परीक्षाएँ लाखों आकांक्षियों के बीच से सर्वश्रेष्ठ छात्रों का चयन करती हैं और उन्हें देश के शीर्ष तकनीकी संस्थानों में प्रवेश का मार्ग प्रशस्त करती हैं। इन दोनों परीक्षाओं के बीच के संबंध और अंतर को समझना हर JEE उम्मीदवार के लिए रणनीति बनाने का प्रथम चरण है।
दरअसल, JEE Main और JEE Advanced का एक सुनिश्चित क्रम और पात्रता श्रृंखला में गहरा संबंध है। JEE Main एक फिल्टर का काम करता है, जिसके आधार पर केवल चुनिंदा उम्मीदवारों को ही अगले चरण, यानी JEE Advanced में बैठने का अवसर मिलता है। आइए, इन दोनों महत्वपूर्ण परीक्षाओं के उद्देश्य, आपसी संबंध और विशेषताओं को विस्तार से समझते हैं। आज के इस लेख में आपको ना केवल इन दोनों पेपर के बीच का समूचा अंतर जानने को मिलेगा बल्कि साथ ही हम आपको यह भी बताएँगे कि JEE Main और JEE Advanced क्या है और इनका क्या महत्व है। तो चलिए शुरू करते हैं।
JEE Main और JEE Advanced क्या है?
JEE (जॉइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन) इंजीनियरिंग में प्रवेश के लिए भारत की दो-चरणीय प्रवेश परीक्षा प्रणाली है, जिसमें JEE Main पहला चरण और JEE Advanced दूसरा व अंतिम चरण है। ये परीक्षाएँ लाखों आकांक्षियों के बीच से सर्वश्रेष्ठ छात्रों का चयन करती हैं और उन्हें देश के शीर्ष तकनीकी संस्थानों में प्रवेश का मार्ग प्रशस्त करती हैं। इन दोनों परीक्षाओं के बीच के संबंध और अंतर को समझना हर JEE उम्मीदवार के लिए रणनीति बनाने का प्रथम चरण है।
दरअसल, JEE Main और JEE Advanced का एक सुनिश्चित क्रम और पात्रता श्रृंखला में गहरा संबंध है। JEE Main एक फिल्टर का काम करता है, जिसके आधार पर केवल चुनिंदा उम्मीदवारों को ही अगले चरण, यानी JEE Advanced में बैठने का अवसर मिलता है। आइए, इन दोनों महत्वपूर्ण परीक्षाओं के उद्देश्य, आपसी संबंध और विशेषताओं को विस्तार से समझते हैं।
JEE Main और JEE Advanced का आपसी संबंध: चरणबद्ध प्रक्रिया
दोनों परीक्षाओं के बीच का संबंध एक स्पष्ट चरणबद्ध प्रक्रिया के रूप में देखा जा सकता है। नीचे दी गई प्रवाह तालिका (Flowchart) इस प्रक्रिया को समझने में आपकी सहायता करेगी।

महत्वपूर्ण समानताएँ और नियम
जहाँ अंतर स्पष्ट हैं, वहीं कुछ मूलभूत समानताएँ भी हैं जिनका हर उम्मीदवार को ध्यान रखना चाहिए:
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अनिवार्य कड़ी: JEE Advanced में बैठने के लिए JEE Main देना और उसमें शीर्ष 2.5 लाख रैंक हासिल करना अनिवार्य शर्त है।
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शैक्षणिक पात्रता: JEE Main के लिए निर्धारित न्यूनतम अंक/परसेंटाइल मानदंड स्वतः ही JEE Advanced के लिए भी मान्य होते हैं।
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प्रयासों की संख्या: एक छात्र लगातार दो वर्षों में केवल दो बार ही JEE Advanced में बैठ सकता है।
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सर्वश्रेष्ठ स्कोर मान्य: यदि किसी छात्र ने एक वर्ष में दोनों JEE Main सत्र दिए हैं, तो दोनों में से सर्वश्रेष्ठ स्कोर को JEE Advanced की पात्रता के लिए माना जाएगा।
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सीधा संबंध: JEE Advanced का पेपर पैटर्न और कठिनाई स्तर JEE Main से पूरी तरह अलग होता है। JEE Main में अच्छा प्रदर्शन JEE Advanced की गारंटी नहीं है, बल्कि केवल एक मौक (Opportunity) है।
JEE Main और JEE Advanced के बीच क्या अंतर है?
सबसे पहले तो आप यह जान लें कि यह दोनों ही एग्जाम स्टूडेंट्स के देशभर के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन करवाने के लिए लिए जाते हैं। बस एक छोटा लेवल है तो दूसरा थोड़ा बड़ा लेवल है। कहने का अर्थ यह हुआ कि जो JEE Main का एग्जाम होता है, वो फर्स्ट लेवल होता है तो वहीं JEE Advanced का लेवल आखिरी लेवल होता है।
निम्नलिखित तालिका JEE Main और JEE Advanced के बीच मुख्य अंतर को स्पष्ट रूप से दर्शाती है:
| पैरामीटर | JEE Main | JEE Advanced |
|---|---|---|
| आयोजन कर्ता | नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) | इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IITs) |
| उद्देश्य | NITs, IIITs, अन्य GFTIs और राज्य/निजी कॉलेजों में प्रवेश | केवल IITs में प्रवेश |
| पात्रता | कक्षा 12वीं में 75% अंक (65% आरक्षित वर्ग) या टॉप 20 परसेंटाइल | JEE Main में टॉप 2,50,000 रैंक धारक (वर्ग-वार आरक्षण) |
| परीक्षा आवृत्ति | वर्ष में दो बार (जनवरी और अप्रैल सत्र) | वर्ष में एक बार |
| प्रश्नों का स्तर | मध्यम से कठिन, कक्षा 11-12 सिलेबस आधारित | अत्यधिक कठिन, अवधारणात्मक और अनुप्रयोगात्मक |
| परीक्षा पैटर्न | स्थिर और पूर्वनिर्धारित | परिवर्तनशील; हर वर्ष पैटर्न बदल सकता है |
| स्कोर वैधता | केवल उसी वर्ष के लिए | केवल उसी वर्ष के लिए |
अब कुछ स्टूडेंट्स तो IIT और JEE के बीच क्या अंतर होता है, इसके बारे में भी जानना चाहते हैं। वह इसलिए क्योंकि हम में से बहुत से JEE के एग्जाम को IIT का एग्जाम भी कह देते हैं जो कि गलत भी नहीं है। ऐसे में आर्टिकल के लास्ट में हम आपको इसके बारे में भी बताएँगे। तो चलिए शुरू करते हैं।
1. फुल फॉर्म और पुराने नाम
JEE Main और JEE Advanced के बीच के अंतर को समझने से पहले आप यह समझ लें कि इन दोनों की फुल फॉर्म क्या है और इनका पहले क्या नाम था। इनकी फुल फॉर्म और इनके पुराने नाम जानकर आपको दोनों के बीच का आधे से ज्यादा अंतर तो यहीं क्लियर हो जाएगा क्योंकि लोगों ने इनके पुराने नाम ही सुन रखे होते हैं।
तो JEE Main की फुल फॉर्म Joint Entrance Examination – Main होती है तो वहीं JEE Advanced की फुल फॉर्म Joint Entrance Examination – Advanced है। अब आप कहेंगे कि इससे हमें क्या ही पता चला क्योंकि दोनों में JEE की फुल फॉर्म तो एक जैसी ही है। ऐसे में आप इनका पुराना नाम सुन लें।
तो JEE Main को पहले AIEEE के नाम से जाना जाता था तो वहीं JEE Advanced को IIT – JEE के नाम से जाना जाता था। अब बहुत लोगों ने अवश्य ही AIEEE का नाम सुन रखा होगा। वह इसलिए क्योंकि AIEEE का एग्जाम देशभर की NIT में एडमिशन के लिए लिया जाता था तो वहीं IIT – JEE का एग्जाम IIT में एडमिशन के लिए लिया जाता था। आज भी वैसा ही होता है लेकिन कुछ परिवर्तनों के साथ।
2. किस कॉलेज में एडमिशन मिलेगा
अब यह तो आप जान ही गए हैं कि JEE के यह दोनों ही एग्जाम स्टूडेंट्स को देश के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन करवाने के उद्देश्य से कंडक्ट करवाए जाते हैं लेकिन किस एग्जाम से किस तरह के कॉलेज में एडमिशन मिलता है, यह जानना भी तो जरुरी है।
तो JEE Main के द्वारा आपको देशभर की 32 NITs (National Institutes of Technology), 26 IIITs (Indian Institutes of Information Technology) और 40 GFTIs (Government Funded Technical Institutes) में एडमिशन मिलता है। वहीं यदि आप JEE Advanced को क्लियर कर देते हैं तो आपको देशभर की 23 IITs (Indian Institutes of Technology) में एडमिशन मिलता है।
3. एग्जाम कौन लेता है?
अब बात करते हैं JEE Main और JEE Advanced का एग्जाम कंडक्ट करवाने वाली एजेंसी के बारे में। तो JEE Main का एग्जाम NTA अर्थात National Testing Agency के द्वारा कंडक्ट करवाया जाता है वर्ष 2018 तक तो यह एग्जाम Central Board of Secondary Education कंडक्ट करवा रही थी लेकिन 2019 से यह दायित्व नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के द्वारा निभाया जा रहा है।
वहीं यदि हम JEE Advanced एग्जाम की बात करें तो इसे आईआईटी ज्वाइंट एडमिशन बोर्ड (IIT Joint Admission Board) के द्वारा कंडक्ट करवाया जाता है। इसमें 23 IIT में से टॉप 7 IIT आती है जिनके नाम रुड़की, खड़गपुर, दिल्ली, कानपुर, बॉम्बे, हैदराबाद और गुवाहाटी आईआईटी है। अब यह रोटेशन के हिसाब से हरेक IIT के द्वारा कंडक्ट करवाया जाता है।
4. एग्जाम की शुरुआत
यह भी JEE Main और JEE Advanced के बीच का एक महत्वपूर्ण अंतर (JEE Main and JEE Advanced Difference in Hindi) है। इसलिए आपका इसके बारे में भी जानना जरुरी हो जाता है। तो JEE Main एग्जाम की शुरुआत आज से लगभग 22 वर्ष पहले सन 2002 में हुई थी तो वहीं JEE Advanced की शुरुआत आज से 63 वर्ष पहले सन 1961 में ही हो गई थी। कहने का अर्थ यह हुआ कि JEE Main एग्जाम JEE Advanced से बहुत बाद में शुरू हुआ था।
5. एग्जाम का स्तर
अब करते हैं JEE Main और JEE Advanced के स्तर की बात। कहने का तात्पर्य यह हुआ कि इन दोनों एग्जाम में से कौन सा एग्जाम ज्यादा कठिन होता है और कौन सा ज्यादा सरल। तो यह तो सीधी सी बात है कि लेवल एक का एग्जाम लेवल दो वाले से सरल ही होगा। इस तरह से JEE Main का एग्जाम JEE Advanced की तुलना में थोड़ा सरल जरुर होता है लेकिन इतना भी नहीं। वह इसलिए क्योंकि हर वर्ष इसमें लाखों स्टूडेंट्स बैठते हैं लेकिन सेलेक्ट होने वाले स्टूडेंट्स बहुत कम होते हैं।
साथ ही स्टूडेंट्स को टॉप लेवल के इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन लेने के लिए स्कोर भी उसी लेवल का लाना होता है। ऐसे में उसे टॉप लेवल के कोचिंग इंस्टीट्यूट से पढ़ना चाहिए अन्यथा वह JEE Main में ही सेलेक्ट नहीं हो पाएगा, JEE Advanced तो बहुत दूर की बात है। भारत के कुछ टॉप JEE कोचिंग इंस्टीट्यूट के नाम मैट्रिक्स अकैडमी सीकर, कोटा का एलन इंस्टीट्यूट, दिल्ली आकाश इंस्टीट्यूट है।
6. एक साल में कितनी बार
अब बात करते हैं कि यह JEE Main और JEE Advanced का एग्जाम एक साल में कितनी बार कंडक्ट करवाया जाता है और कब-कब करवाया जाता है। तो JEE Main का एग्जाम एक साल में दो बार लिया जाता है। पहला पेपर जनवरी में होता है तो दूसरा पेपर अप्रैल के महीने में होता है। ऐसे में अगर आपका जनवरी वाला पेपर अच्छा नहीं गया है तो आप अप्रैल में वापस इसे दे सकते हैं।
वहीं JEE Advanced का एग्जाम साल में बस एक बार लिया जाता है और वह JEE Main के दोनों एग्जाम हो जाने के बाद उसके रिजल्ट के आधार पर लिया जाता है। कहने का अर्थ यह हुआ कि जिन स्टूडेंट्स ने JEE Main का एग्जाम पास कर लिया है और टॉप 2.5 लाख स्टूडेंट्स में आए हैं, वे ही JEE Advanced के एग्जाम में बैठ सकते हैं। JEE Advanced का एग्जाम जून के महीने में लिया जाता है।
7. एग्जाम का क्राइटेरिया
अब आपने यह तो जान लिया है कि JEE Main और JEE Advanced का एग्जाम (JEE Main or JEE Advanced) साल में कितनी बार लिया जाता है लेकिन साथ में यह भी जान लें कि यह एग्जाम कितनी शिफ्ट में होता है। तो JEE Main का पेपर एक ही शिफ्ट में होगा जो 3 घंटे की होगी। इसमें आपसे फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स के प्रश्न पूछे जाएंगे।
वहीं अगर हम JEE Advanced की बात करें तो इसमें एक ही दिन में दो शिफ्ट में पेपर होते हैं। हरेक शिफ्ट 3-3 घंटे की होती है और सब्जेक्ट्स वही रहते हैं। इस तरह से JEE Main का एग्जाम 3 घंटों का तो वहीं JEE Advanced का एग्जाम 6 घंटों का होता है।
8. किस लैंग्वेज में होता है एग्जाम
JEE Main का एग्जाम हिंदी व अंग्रेजी सहित 13 भारतीय भाषाओं में लिया जाता है। यह 13 भाषाएँ हिंदी, अंग्रेजी, आसामी, बंगाली, गुजराती, कन्नड़, मलयालम, मराठी, ओड़िया, पंजाबी, तमिल, तेलुगु और उर्दू है। वहीं JEE Advanced का एग्जाम केवल हिंदी और अंग्रेजी में ही लिया जाता है।
9. एग्जाम फीस
अब यदि हम आपके साथ JEE Main और JEE Advanced को देने के लिए फीस की बात करें तो वह भी एक मुख्य अंतर है। वह इसलिए क्योंकि JEE Advanced की फीस JEE Main की तुलना में बहुत ज्यादा होती है। अब यह फीस भी स्टूडेंट्स की जातियों के अनुसार अलग-अलग होती है। JEE Main के लिए जनरल कैटेगरी के स्टूडेंट्स को 1000 रुपए, जनरल EWS व OBC को 900 रुपए, SC, ST, विकलांग और थर्ड जेंडर के लिए 500 रुपए होती है।
वहीं JEE Advanced की फीस भारतीय नागरिकों के लिए 3200 से लेकर 1600 रुपए के बीच में होती है। वहीं यदि हम विदेशी नागरिकों की बात करें तो यह 100 से 200 डॉलर तक होती है जो भारतीय मुद्रा के अनुसार 9 से 20 हज़ार के बीच होती है।
10. एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया
अब करते हैं JEE Main और JEE Advanced के बीच मुख्य अंतर की बात। वह है JEE का एग्जाम कौन दे सकता है और कौन नहीं। तो इसके लिए वैसे तो कई मापदंड होते हैं लेकिन यहाँ हम आपको दोनों के बीच के अंतर वाले क्राइटेरिया को बताने जा रहे हैं। तो JEE Main एग्जाम को देने के लिए कोई आयु सीमा नहीं होती है जबकि JEE Advanced के लिए अधिकतम आयु सीमा 25 वर्ष (आरक्षित वर्ग के लिए 30 वर्ष) है।
JEE Main को लगातार तीन वर्षों तक अधिकतम 6 प्रयास के तहत दिया जा सकता है तो वहीं JEE Advanced के लिए अधिकतम 2 प्रयास और वह भी बारहवीं के साथ वाला वर्ष और उसका अगला वर्ष ही होता है। उदाहरण के तौर पर यदि कोई स्टूडेंट 2024 में अपनी बारहवीं का एग्जाम देता है तो वह वर्ष 2024 और 2025 का JEE Advanced का एग्जाम ही दे सकता है, 2026 या उसके बाद के वर्षों का नहीं।
IIT और JEE में क्या अंतर है?
अब आप यह भी जान लें कि IIT और JEE में क्या अंतर है। वैसे तो आपको अभी तक का आर्टिकल पढ़कर इसके बारे में समझ आ ही गया होगा। तो IIT का अर्थ तो केंद्रीय सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज से होता है जबकि JEE का अर्थ देश की IIT सहित अन्य केंद्रीय सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन पाने के लिए कंडक्ट करवाया जाने वाला एग्जाम होता है।
निष्कर्ष:
इस संपूर्ण चर्चा से स्पष्ट है कि JEE Main और JEE Advanced एक दूसरे के पूरक हैं। एक सफल रणनीति में JEE Main को मजबूत आधार बनाना और उसके बाद JEE Advanced के लिए विशेष तैयारी करना शामिल है। JEE Main की तैयारी करते समय ही उच्च-स्तरीय अवधारणात्मक समझ विकसित करनी होगी, जो आगे चलकर JEE Advanced में काम आएगी।
इतनी चुनौतीपूर्ण यात्रा में एक मार्गदर्शक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। मैट्रिक्स JEE अकादमी, सीकर जैसे संस्थान इसी आवश्यकता को पूरा करते हैं, जो न केवल JEE Main की मजबूत नींव डालते हैं बल्कि उन्नत स्तर (Advanced Level) की समस्याओं के माध्यम से छात्रों को IITs के लिए तैयार करते हैं। सही दिशा-निर्देश, संरचित अध्ययन और लगातार अभ्यास ही इस दोहरी चुनौती को सफलता में बदल सकते हैं।
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