भारत में जब भी चिकित्सा शिक्षा, उच्च स्तरीय इलाज और विश्वसनीय स्वास्थ्य सेवाओं की बात होती है, तो सबसे पहले जिस नाम का उल्लेख किया जाता है, वह है AIIMS। देश के लाखों मेडिकल छात्रों के लिए AIIMS में पढ़ाई करना एक सपना होता है, वहीं आम जनता के लिए यह संस्थान भरोसेमंद और किफायती इलाज का केंद्र है।
AIIMS संस्थानों ने न केवल डॉक्टरों की कई पीढ़ियाँ तैयार की हैं, बल्कि भारत में चिकित्सा अनुसंधान, उच्च स्तरीय इलाज और ग्रामीण-शहरी स्वास्थ्य संतुलन को मजबूत करने में भी ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। आज AIIMS देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थापित होकर चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा दे रहे हैं।
AIIMS क्या है?
AIIMS का पूरा नाम अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (All India Institute of Medical Sciences) है। यह भारत सरकार द्वारा स्थापित ऐसे मेडिकल संस्थान हैं, जिन्हें राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित किया गया है। AIIMS का मुख्य उद्देश्य उच्च गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा प्रदान करना, चिकित्सा अनुसंधान को बढ़ावा देना और आम जनता को उन्नत स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराना है। AIIMS केवल एक मेडिकल कॉलेज या अस्पताल नहीं है, बल्कि ये संस्थान भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ माने जाते है।
भारत के शीर्ष AIIMS में से किसी एक में प्रवेश पाना हर मेडिकल छात्र का सपना होता है। AIIMS संस्थानों में MBBS, MD, MS, DM, MCh, नर्सिंग और अन्य पैरामेडिकल पाठ्यक्रम संचालित किए जाते हैं। इन संस्थानों में प्रवेश पूरी तरह से राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं जैसे NEET UG और NEET PG के माध्यम से लिया जाता है, प्रवेश की इस प्रक्रिया से देशभर के प्रतिभाशाली छात्रों को समान अवसर मिलना सुनिश्चित होता है।
AIIMS संस्थानों की स्थापना का इतिहास
स्वतंत्रता के बाद भारत सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक चुनौती स्वास्थ्य सेवाओं की कमी थी। उस समय देश में न तो पर्याप्त प्रशिक्षित डॉक्टर थे और न ही उच्च स्तरीय चिकित्सा संस्थान जहाँ नए और प्रशिक्षित डॉक्टर्स तैयार किये जा सकते हो। इसी कारण से भारतीय लोगों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता था। इस गंभीर समस्या को समझते हुए भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री डॉ राजकुमारी अमृत कौर ने एक ऐसे संस्थान की कल्पना की, जो चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और इलाज तीनों क्षेत्रों में विश्वस्तरीय हो। उनकी इसी सोच के चलते AIIMS (अखिल भारतीय चिकित्सा संस्थान) की नींव न्यूजीलैंड के उद्योग और वाणिज्य मंत्री ने वर्ष 1952 में दिल्ली रखी।
AIIMS दिल्ली की स्थापना (1956)
स्वतंत्रता के बाद नेहरू सरकार ने यूके के लंदन AIIMS मॉडल से प्रेरित होकर इसे वर्ष 1956 में उसी मॉडल से पुन: स्थापित किया, जिसका उद्घाटन 26 फरवरी 1957 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने किया। फिर इसे संसद के ‘अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान अधिनियम, 1956’ द्वारा राष्ट्रीय महत्व का स्वायत्त संस्थान घोषित किया गया, तथा भारत के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधीन कर इसे पूर्ण प्रशासनिक व वित्तीय स्वतंत्रता प्रदान की गई है।
वर्ष 1956 से ही 213 एकड़ के कैंपस परिसर में यहाँ MBBS की पढाई शुरू की गई जो अब तक निरंतर चल रही है। वर्तमान समय में यह संस्थान समूचे एशिया महाद्वीप का प्रमुख और उत्कृष्ट रेफरल सेंटर बन चूका है जहाँ प्रतिदिन 15 से 20 हजार तक OPD मरीज देखे जाते है। इन्हीं उपलब्धियों के चलते यह संस्थान NIRF Ranking में लगातार 10 वर्ष से पहले स्थान पर काबिज है, जिसमे इसका स्कोर 91.80/100 रहा है।
AIIMS की स्थापना का उद्देश्य
AIIMS दिल्ली की स्थापना केवल एक मेडिकल कॉलेज के रूप में नहीं की गई थी, बल्कि इसके पीछे एक दूरदर्शी सोच और राष्ट्रीय आवश्यकता जुड़ी हुई थी। स्वतंत्रता के बाद भारत को ऐसे चिकित्सा संस्थान की आवश्यकता थी, जो उच्च गुणवत्ता की शिक्षा, अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवाओं को एक ही मंच पर उपलब्ध करा सके। AIIMS दिल्ली की स्थापना के मुख्य उद्देश्य आज भी इसके शैक्षणिक ढाँचे, अस्पताल सेवाओं और अनुसंधान कार्यों में स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं।
- AIIMS दिल्ली का प्रमुख उद्देश्य ऐसे डॉक्टर, नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ तैयार करना है जो न केवल शैक्षणिक रूप से सक्षम हों, बल्कि मरीजों के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार भी हों। यहाँ शिक्षा को सेवा भावना से जोड़ा जाता है।
- इस संस्थान में चिकित्सा विज्ञान, दंत चिकित्सा और नर्सिंग के क्षेत्र में अनुसंधान को विशेष महत्व दिया जाता है। नए उपचार तरीकों, दवाओं और तकनीकों पर किए गए शोध देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करते हैं।
- AIIMS दिल्ली का उद्देश्य यह भी है कि आम नागरिकों को अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएँ बहुत कम या नाममात्र शुल्क पर मिल सकें, ताकि आर्थिक स्थिति किसी के इलाज में बाधा न बने।
- राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता का मानक तय करना भी AIIMS दिल्ली का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य रहा है, जिससे भारत का नाम वैश्विक चिकित्सा जगत में सम्मान के साथ लिया जा सके।
भारत में AIIMS की कुल संख्या
भारत में AIIMS (All India Institute of Medical Sciences) की कुल संख्या लगभग 20 मुख्य कार्यरत संस्थान हैं, और कुछ नए AIIMS निर्माणाधीन या प्रस्तावित भी हैं। यह संस्थान भारत भर में मेडिकल शिक्षा, अस्पताल और रिसर्च के लिए महत्वपूर्ण केंद्र हैं।
| एम्स का नाम | राज्य / केंद्र शासित प्रदेश |
| AIIMS अवन्तिपोरा | जम्मू – कश्मीर |
| AIIMS ऋषिकेश | उत्तराखंड |
| AIIMS कल्याणी | पश्चिम बंगाल |
| AIIMS गुवाहाटी | असम |
| AIIMS गोरखपुर | उत्तर प्रदेश |
| AIIMS जोधपुर | राजस्थान |
| AIIMS दर्भंगा | बिहार |
| AIIMS देवघर | झारखंड |
| AIIMS नई दिल्ली | दिल्ली |
| AIIMS नागपुर | महाराष्ट्र |
| AIIMS पटना | बिहार |
| AIIMS बठिंडा | पंजाब |
| AIIMS बिबिनगर | तेलंगाना |
| AIIMS बिलासपुर | हिमाचल प्रदेश |
| AIIMS बेंगलुरु | कर्नाटक |
| AIIMS भुवनेश्वर | ओडिशा |
| AIIMS भोपाल | मध्य प्रदेश |
| AIIMS मंगलगिरी | आंध्र प्रदेश |
| AIIMS मदुरै | तमिलनाडु |
| AIIMS माजरा | हरियाणा |
| AIIMS राजकोट | गुजरात |
| AIIMS रायपुर | छत्तीसगढ़ |
| AIIMS रायबरेली | उत्तर प्रदेश |
| AIIMS रेवाड़ी | हरियाणा |
| AIIMS विजयपुर | जम्मू और कश्मीर |
AIIMS संस्थानों के विस्तार की आवश्यकता
AIIMS दिल्ली की सफलता के बाद यह स्पष्ट हो गया कि ऐसे संस्थानों की आवश्यकता केवल राजधानी तक सीमित नहीं होनी चाहिए। भारत जैसे विशाल देश में स्वास्थ्य सेवाओं का असमान वितरण एक बड़ी समस्या थी। और यह समस्या ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में तो और भी ज्यादा गंभीर थी। भारत सर्कार ने इसी समस्या के निदान के लिए देशभर में लगातार नए AIIMS संस्थाओं की स्थापना की जो वर्तमान समय तक चल रही है। AIIMS मॉडल की स्थापना भारत सरकार ने निम्न उद्देश्यों की पूर्ति के लिए की, ताकि
- देश के हर क्षेत्र को उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा मिल सके,
- देश में व्याप्त क्षेत्रीय स्वास्थ्य असमानताओं को कम किया जा सके,
- मेडिकल शिक्षा की यह प्रणाली एक जगह केवल दिल्ली में क्रेंद्रित न होकर इनका विकेंद्रीकरण हो सके।
नए AIIMS संस्थानों की शुरुआत
वर्ष 2012 में प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली UPA सरकार ने ‘प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना’ (PMSSY) के तहत नए AIIMS की घोषणा की, जो चिकित्सा शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने के उद्देश्य से स्थापित किए गए। इनकी स्थापना संसद द्वारा पारित AIIMS (संशोधन) अधिनियम, 2012 के माध्यम से हुई, जिसमें प्रत्येक AIIMS संस्थान को स्वायत्त एवं राष्ट्रीय महत्व के संस्थान का दर्जा दिया गया।
प्रमुख नए AIIMS संस्थान
मेडिकल शिक्षा जगत के विशेषज्ञ इन नए AIIMS संस्थानों की स्थापना को 3 महत्वपूर्ण पीढ़ियों में वर्गीकृत करते है जो निम्न है:
- पहली पीढ़ी (2012): इसमें इन संस्थानों को सम्मिलित किया जाता है; AIIMS भोपाल (मध्य प्रदेश), AIIMS भुवनेश्वर (ओडिशा), AIIMS जोधपुर (राजस्थान), AIIMS ऋषिकेश (उत्तराखंड), AIIMS रायपुर (छत्तीसगढ़), AIIMS पटना (बिहार)।
- दूसरी पीढ़ी (2018-19): इन दो सालों में इन AIIMS संस्थानों की स्थापना की गई; AIIMS मंगलागिरि (आंध्र प्रदेश), AIIMS नागपुर (महाराष्ट्र), AIIMS कल्याणी (पश्चिम बंगाल)।
- हालिया विस्तार: यह पहले दो पीढ़ियों की तरह किन्ही निश्चित साल में स्थापित नहीं किये गए बल्कि ये विस्तार की प्रक्रिया में है; AIIMS गोरखपुर (उत्तर प्रदेश), AIIMS राजकोट (गुजरात), AIIMS बठिंडा (पंजाब), AIIMS रानीपुर (हरिद्वार) सहित अन्य संस्थानों की स्थापना हाल ही के वर्षों में की गई है।
AIIMS संस्थानों की वर्तमान स्थिति व प्रभाव
वर्तमान में भारत में 26 AIIMS कार्यरत हैं, जिनमें से 20 पूर्ण रूप से संचालित हैं जबकि शेष बन रहे हैं। इन AIIMS संस्थानों की कुल MBBS सीटें 2044 हैं, जिनमें छात्रों को प्रवेश NEET exam के स्कोर के आधार पर NMC की काउंसलिंग प्रक्रिया के माध्यम से दिया जाता है।
AIIMS संस्थानों का प्रशासन और संचालन
जैसा की आपने ऊपर इसी ब्लॉग में पढ़ा किAIIMS संस्थानों का संचालन केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा किया जाता है। भारत में जितने भी AIIMS संस्थान है ये सभी स्वायत्त संस्था है, जिनका अपना बोर्ड ऑफ गवर्नर्स है और अपनी एक संचालन प्रक्रिया है। लेकिन यहाँ ध्यान देने योग्य बात यह है कि प्रत्येक AIIMS संस्थान का ढांचा व उद्देश्य समान रखा गया है।
AIIMS संस्थानों की प्रशासनिक व्यवस्था
AIIMS संस्थानों की निम्न प्रशासनिक व्यवस्थाएँ शिक्षा, अनुसंधान व रोगी सेवा की उत्कृष्टता सुनिश्चित करती हैं।
- निदेशक: ये संस्थान के प्रमुख होते है, जो अपने संस्थान के दैनिक संचालन, उसके लिए नीतियाँ व विकास की जिम्मेदारी सँभालते हैं।
- शैक्षणिक परिषद: यह परिषद संस्थान में संचालित MBBS, MD/MS जैसे कोर्सों का पाठ्यक्रम, परीक्षाएँ व उसकी गुणवत्ता निर्धारित करती है।
- अनुसंधान समिति: यह समिति AIIMS संस्थान में ICMR प्रोजेक्ट्स, पब्लिकेशन व इनोवेशन को प्रोत्साहित करती है।
- अस्पताल प्रशासन: AIIMS संस्थान का यह प्रशासकीय विभाग कॉलेज से संबद्ध अस्पताल, ओपीडी, ट्रॉमा सेंटर व रेफरल सेवाओं का प्रबंधन करता है।
छात्रों के लिए AIIMS का महत्त्व
मेडिकल क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देखने वाले छात्रों के लिए AIIMS केवल एक कॉलेज नहीं, बल्कि एक ऐसा मंच है जहाँ छात्रों की प्रतिभा, मेहनत और अनुशासन को सही दिशा मिलती है। यहाँ छात्रों की पढ़ाई का उद्देश्य केवल MBBS की डिग्री लेना नहीं, बल्कि एक सक्षम, संवेदनशील और आत्मविश्वासी डॉक्टर बनना होता है। AIIMS संस्थानों में मिलने वाला वातावरण मेडिकल छात्रों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके अलावा AIIMS संस्थान छात्रों के लिए यह महत्त्व रखते है:
- AIIMS में शिक्षण प्रणाली सुव्यवस्थित होती है। यहाँ मेडिकल शिक्षा के छात्रों को उनके विषयों में गहरी समझ विकसित करवाने पर विशेष ध्यान दिया जाता है, जिससे वे केवल परीक्षा ही नहीं, बल्कि भविष्य की चिकित्सकीय चुनौतियों के लिए भी तैयार होते हैं।
- छात्रों को अस्पतालों में कई प्रकार की बीमारियों के इलाज करने का अनुभव मिलता है। इससे उनमें आत्मविश्वास, संवेदनशीलता और तेजी से निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है।
- AIIMS में पढ़ने वाले अधिकांश छात्र NEET UG परीक्षा में उच्च रैंक प्राप्त करते हैं। इससे इन संस्थानों में शुरुआत से ही छात्रों को प्रतिस्पर्धी माहौल मिलता है, जो उन्हें नियमित अध्ययन, अनुशासन और निरंतर सुधार के लिए प्रेरित करता है।
- यहाँ से पढ़ाई करने वाले छात्र आगे चलकर मेडिकल क्षेत्र में MD, MS, DM, MCh और शोध कार्यों में बेहतर प्रदर्शन करते हैं, क्योंकि उन्हें प्रारंभ से ही वैज्ञानिक सोच विकसित करने का अवसर मिलता है।
अभिभावकों के लिए AIIMS का महत्त्व
AIIMS अभिभावकों के लिए विश्वास का संस्थान है। यहाँ उनके बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, MBBS और अन्य कोर्सों की पारदर्शी प्रवेश प्रक्रिया और पढाई की अत्यंत कम लागत अभिभावकों की चिंताओं को काफी हद तक कम कर देती है। वे इसके लिए निश्चिंत रहते है की अब मेरे बच्चे का भविष्य उज्जवल है।
- AIIMS में प्रवेश केवल राष्ट्रीय स्तर की NEET UG और NEET PG परीक्षाओं के माध्यम से होता है, जिससे अभिभावकों को यह विश्वास रहता है कि चयन निष्पक्ष पक्षपात रहित योग्यता के आधार पर होगा।
- भारत सरकार का सरकारी संस्थान होने के कारण AIIMS में फीस बहुत कम होती है। इससे सामान्य और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए मेडिकल शिक्षा आसान होती है। अभिभावकों पर किसी भी प्रकार के अतिरिक्त शुल्क का भार नहीं होता है।
- AIIMS से शिक्षा प्राप्त करने के बाद छात्रों के लिए रोजगार और उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ जाते हैं, जिससे अभिभावकों को अपने बच्चे के भविष्य की चिंता कम होती है।
समाज के लिए AIIMS का महत्त्व
AIIMS केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। इसका प्रभाव सीधे आम नागरिकों के जीवन से जुड़ा होता है। इस संस्थान से MBBS की स्नातक डिग्री पूरी करने वाले छात्रों को समाज में अत्यंत सम्मानित दृष्टि से देखा जाता है। ये समाज में अपना सीधा प्रभाव रखते है।
- AIIMS में गरीब और जरूरतमंद वर्ग को भी उन्नत इलाज कम लागत पर मिलता है, जिससे स्वास्थ्य सेवाएँ अधिक समावेशी बनती हैं। ये समाजकल्याण को बढ़ावा देती है।
- AIIMS संस्थानों में होने वाला शोध, प्रशिक्षण और उपचार पूरे देश की चिकित्सा व्यवस्था को दिशा देता है और अन्य संस्थानों के लिए मानक स्थापित करता है।
- महामारी, प्राकृतिक आपदाओं और गंभीर स्वास्थ्य संकटों के समय AIIMS संस्थान देश को विशेषज्ञ सेवाएँ प्रदान कर समाज की रक्षा में योगदान देते हैं।
AIIMS में प्रवेश के लिए NEET UG की तैयारी
हर साल लाखों छात्र NEET UG की तैयारी इस उम्मीद के साथ शुरू करते हैं कि एक दिन वे AIIMS जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में पढ़ाई करेंगे। बढ़ते प्रतिस्पर्धी दौर में छात्रों का AIIMS में प्रवेश पाना कठिन जरूर है, परन्तु सही मार्गदर्शन, निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास के साथ इस लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। NEET UG केवल एक परीक्षा नहीं है, बल्कि यह छात्रों की सोच, धैर्य और अनुशासन की परीक्षा है। AIIMS संस्थानों की सीमित सीटों और देशभर के होनहार छात्रों की प्रतिस्पर्धा को देखते हुए यह जरूरी हो जाता है कि छात्र शुरुआत से ही अपनी तैयारी को गंभीरता से लें और बिना भटके सही दिशा में आगे बढ़ें।
NEET की तैयारी को सही दिशा, अनुशासन और रणनीति से करना होता है। इसलिए Matrix NEET Division से NEET की तैयारी करना फायदेमंद है। यहां सीकर में स्थित सर्वश्रेष्ठ नीट कोचिंग द्वारा नीट परीक्षा की तैयारी के लिए कुछ सुझाव दिए गए हैं:
- कई छात्र मोटी किताबों और ढेर सारी गाइड्स के पीछे भागते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि NEET UG की सफलता की सबसे मजबूत नींव NCERT ही है। खासकर बायोलॉजी और केमिस्ट्री में NCERT की एक-एक पंक्ति समझना और याद रखना बेहद जरूरी है। वर्तमान समय में छात्रों के बीच NEET UG परीक्षा के लिए जो सबसे लोकप्रिय पुस्तकें बनी हुई है, वो मैट्रिक्स अकैडमी की NEET Books है छात्र इन पुस्तकों और इनके मार्गदर्शन से भी अपनी तैयारी को मजबूत बना सकते है।
- NEET परीक्षा के कोचिंग विशेषज्ञों के अनुसार हर छात्र की क्षमता अलग होती है। इसलिए छात्र किसी अन्य की पढाई का रूटीन देखकर खुद पर दबाव न बनाएं। छात्रों को अपनी रणनीति के अनुसार नियमित रूप से पढ़ना, लंबे समय में बहुत बड़ा फर्क पैदा करता है।
- मॉक टेस्ट का उद्देश्य केवल अच्छे नंबर लाना नहीं, बल्कि छात्रों को इन मॉक टेस्ट में हुई अपनी कमियों को पहचानना होता है। उनके लिए हर टेस्ट के बाद यह समझना जरूरी है कि गलती कहाँ हुई और अगली बार उसे कैसे सुधारा जा सकता है। इस प्रक्रिया से उनके वास्तविक पेपर में गलती होने की संभावनाएं कम हो जाती है।
- किसी भी छात्र का AIIMS में चयन होने के लिए उनकी शीर्ष रैंक जरूरी होती है और इसमें सबसे बड़ा स्कोरिंग विषय जीव विज्ञान (Biology) 360 अंकों का है। इसलिए छात्र जीव विज्ञान विषय को गहनता से समझें, NCERT में वर्णित डायग्राम, फ्लोचार्ट और कॉन्सेप्ट क्लियर करके पढ़ाई करने से इस विषय में आत्मविश्वास बढ़ता है। यह विषय छात्रों को शीर्ष रैंक तक पहुंचने का माध्यम है।
- NEET UG परीक्षा की तैयारी एक लंबी यात्रा है। इसकी तैयारी के दौरान छात्रों में थकान, तनाव और कभी-कभी निराशा आना स्वाभाविक है। ऐसे समय में छात्र अपने लक्ष्य AIIMS को याद रखें और यह विश्वास बनाए रखें कि मेहनत उन्हें उनके सपनों के संस्थान में प्रवेश जरूर दिलाएगी।
निष्कर्ष
AIIMS केवल एक मेडिकल संस्थान नहीं है, बल्कि यह उन छात्रों की उम्मीदों का प्रतीक है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ा सपना देखने का साहस रखते हैं। यह वह जगह है जहाँ कड़ी मेहनत करने वाले छात्रों को उनकी योग्यता के अनुसार अवसर मिलता है और उन्हें एक बेहतर डॉक्टर बनने के साथ-साथ एक बेहतर इंसान बनने की सीख भी दी जाती है। वहीं अभिभावकों के लिए AIIMS संस्थान एक भरोसे का नाम है जहाँ शिक्षा की गुणवत्ता, कम फीस और सुरक्षित भविष्य की संभावना उनके मन की चिंताओं को कम कर देती है। AIIMS समाज के लिए ऐसे डॉक्टर तैयार करता है, जो केवल इलाज ही नहीं करते, बल्कि मानवता की सेवा को अपना कर्तव्य मानते हैं। NEET UG की तैयारी कर रहा छात्र यदि सही दिशा, धैर्य और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़े, तो उसका AIIMS संस्थान से MBBS की डिग्री पूरी करने का सपना जरूर साकार हो सकता है।
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FAQ’s
AIIMS का पूरा नाम अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (All India Institute of Medical Sciences) है। यह भारत सरकार द्वारा स्थापित एक स्वायत्त और प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थान है। AIIMS में MBBS, MD, MS, नर्सिंग और अन्य मेडिकल कोर्स कराए जाते हैं।
भारत के सभी AIIMS संस्थानों में MBBS पाठ्यक्रम में प्रवेश NEET UG परीक्षा के माध्यम से दिया जाता है। NEET UG परीक्षा के छात्रों का चयन उनके स्कोर और NMC द्वारा कराई जाने वाली काउंसलिंग के आधार पर किया जाता है।
नहीं, वर्तमान में AIIMS संस्थानों में MBBS के लिए कोई अलग परीक्षा नहीं होती। सभी AIIMS संस्थानों में प्रवेश केवल NEET UG परीक्षा के अंकों के आधार पर दिया जाता है।
वर्तमान में भारत के सभी AIIMS संस्थानों को मिलाकर लगभग 2044 से अधिक MBBS पाठ्यक्रम की सीटें उपलब्ध हैं, जो प्रति वर्ष सरकार एवं NMC द्वारा निर्धारित की जाती हैं।
AIIMS में प्रवेश पाने के लिए छात्रों को NEET UG परीक्षा में अच्छी रैंक की आवश्यकता होती है। पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो AIIMS दिल्ली के लिए NEET UG परीक्षा के टॉप 50-100 रैंक के भीतर स्थान बनाना जरूरी होता है, जबकि अन्य AIIMS संस्थाओं में इससे थोड़ी अधिक रैंक पर भी मौका मिल सकता है।
AIIMS संस्थान भारत सरकार द्वारा वित्तपोषित सरकारी संस्थान होने के कारण यहाँ छात्रों की MBBS पाठ्यक्रम के लिए फीस बहुत कम होती है। सामान्यतः यह फीस कुछ हजार रुपये प्रतिवर्ष के आसपास होती है। AIIMS संस्थानों की सम्पूर्ण जानकारी के लिए आप उपरोक्त ब्लॉग पढ़ सकते हैं।


