NEET परीक्षा में सफलता पाने के बाद हर छात्र और उसके अभिभावक के मन में एक ही सवाल होता है – “क्या हमें सरकारी मेडिकल कॉलेज मिलेगा?” और “इसके लिए कितने नंबर चाहिए?” इंटरनेट पर इस सवाल के गोल-गोल जवाब मिलते हैं, जिनसे छात्रों को स्पष्टता नहीं मिल पाती।
यहाँ तक कि आपको नीट की आधिकारिक वेबसाइट पर भी इसके बारे में सही से जानकारी नहीं मिलेगी। ऐसा इसलिए क्योंकि NEET के तहत सरकारी कॉलेज में एडमिशन लेने की प्रक्रिया जटिल है। ऐसे में अधिकतर या यूँ कहें कि जो लोग इस फील्ड से नहीं गुजरे हैं, उन्हें इसके बारे में सही से नहीं पता होता है। हमने भी इंटरनेट पर इसके बारे में बहुत छानबीन की लेकिन ठीक से क्लेअरिटी नहीं मिली।
हमने इस लेख को NEET में सफल हो चुके छात्रों और टॉप मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों से सीधी बातचीत के बाद तैयार किया है, ताकि आपको संपूर्ण और सटीक जानकारी मिल सके।
NEET में सरकारी कॉलेज के लिए प्रमुख संस्थानों की भूमिका
NEET परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना केवल पहला चरण है। सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पाने के लिए एक जटिल और बहु-स्तरीय प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जिसमें विभिन्न राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय संस्थान शामिल होते हैं। इन संस्थानों में से प्रत्येक की एक विशिष्ट और निर्धारित भूमिका होती है, जो मिलकर पूरी काउंसलिंग और प्रवेश प्रक्रिया को संचालित करते हैं।
इस पूरी प्रणाली को समझे बिना, केवल NEET अंकों के आधार पर यह अनुमान लगाना कि कौन सा कॉलेज मिलेगा, असंभव है। यह समझना आवश्यक है कि NTA द्वारा रैंक जारी करने के बाद, MCC और राज्यों की काउंसलिंग समितियाँ कैसे सीटों का आवंटन करती हैं, और कैसे AIIMS जैसे शीर्ष संस्थानों की अपनी प्रक्रिया होती है। आइए, इन प्रमुख संस्थानों और उनकी भूमिकाओं को विस्तार से समझते हैं।
1. राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी: National Testing Agency (NTA)
NTA का काम NEET परीक्षा आयोजित करना, उत्तर कुंजी जारी करना, और अंतिम अंक व रैंक जारी करना है। यह संस्था केवल परीक्षा परिणाम तक ही सीमित है। काउंसलिंग प्रक्रिया में इसकी कोई भूमिका नहीं होती।
2. मेडिकल काउंसलिंग कमेटी: Medical Counselling Committee (MCC)
MCC केंद्रीय स्तर पर काउंसलिंग की प्रक्रिया संचालित करती है। यह देश के सभी AIIMS, JIPMER, BHU, AMU जैसे केंद्रीय संस्थानों और राज्य कॉलेजों की 15% AIQ (अखिल भारतीय कोटा) सीटों के लिए काउंसलिंग करती है।
3. राज्य काउंसलिंग प्राधिकरण: State Counselling Authorities
हर राज्य की अपनी अलग काउंसलिंग प्राधिकरण होती है (जैसे: RUHS, UPMCC, MPMCEC, HSTES)। ये अपने-अपने राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों की 85% सीटों के लिए काउंसलिंग आयोजित करते हैं।
4. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान: All India Institute of Medical Sciences (AIIMS)
भारत के शीर्ष स्तर के मेडिकल संस्थान हैं। वर्तमान में देश में 23 AIIMS संचालित हैं, जिनमें प्रवेश पूरी तरह NEET स्कोर और MCC काउंसलिंग के माध्यम से होता है।
5. अन्य केंद्रीय एवं राज्य सरकारी मेडिकल कॉलेज
इनमें केंद्रीय विश्वविद्यालयों से संबद्ध कॉलेज (जैसे BHU, AMU) और विभिन्न राज्यों के सरकारी मेडिकल कॉलेज शामिल हैं।
NEET में सरकारी कॉलेज पाने के लिए कितने नंबर? (2024-25 के आंकड़ों के आधार पर)
NEET परीक्षा में सरकारी मेडिकल कॉलेज पाने के लिए आवश्यक अंकों का सवाल हर उम्मीदवार के मन में होता है, लेकिन इसका कोई एक सीधा और सरल उत्तर नहीं है। कई वेबसाइट और स्रोत केवल अंकों की एक सामान्य रेंज बता देते हैं, जो अक्सर भ्रम पैदा करती है। वास्तविकता यह है कि NEET में कॉलेज का मिलना केवल प्राप्त अंकों पर ही निर्भर नहीं करता, बल्कि यह एक जटिल समीकरण है जिसमें आपकी अखिल भारतीय रैंक (AIR), आपकी राज्य-स्तरीय रैंक, आपकी श्रेणी (जनरल/OBC/SC/ST/EWS), और उस वर्ष की प्रतिस्पर्धा व सीटों की उपलब्धता जैसे कारक शामिल होते हैं।
इस लेख में दिए गए अनुमानित अंक NEET 2024 और 2025 की आधिकारिक काउंसलिंग डेटा के गहन विश्लेषण के आधार पर प्रस्तुत किए गए हैं। यह जानना महत्वपूर्ण है कि यह डेटा और अनुमान मुख्य रूप से सामान्य (General) श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए प्रासंगिक हैं। आरक्षित श्रेणियों (OBC, SC, ST, EWS) के लिए कट-ऑफ अंक काफी कम होते हैं और उनका अलग से विश्लेषण आवश्यक है। साथ ही, ये आंकड़े केवल एक मार्गदर्शन हैं; वास्तविक Cut-Off कई चरणों पर निर्भर करती है और हर वर्ष थोड़ी बहुत बदलती रहती है।
NEET 2025 26 : सरकारी कॉलेजों के लिए अनुमानित स्कोर रेंज
एनईईटी 2025 -26 परीक्षा में सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए स्कोर रेंज का अनुमान पिछले वर्षों के ट्रेंड्स, कटऑफ और सीटों की उपलब्धता पर आधारित है। यह तालिका विभिन्न प्रकार के सरकारी कॉलेजों के लिए अनुमानित स्कोर, ऑल इंडिया रैंक (AIR) और महत्वपूर्ण टिप्पणियों को दर्शाती है। ध्यान दें कि वास्तविक Cut-Off परीक्षा की कठिनाई, कैटेगरी और राज्य कोटा पर निर्भर करती है, इसलिए तैयारी में निरंतरता बनाए रखें।
| कॉलेज का प्रकार | अनुमानित स्कोर रेंज | अनुमानित AIR रेंज | महत्वपूर्ण टिप्पणी |
|---|---|---|---|
| टॉप AIIMS (दिल्ली, मुंबई, जोधपुर) | 700 – 720 | 1 – 50 | बेहद प्रतिस्पर्धी, निरंतर उच्च स्कोर की आवश्यकता |
| अन्य AIIMS व प्रतिष्ठित केंद्रीय संस्थान | 680 – 700 | 50 – 1000 | JIPMER, BHU, AMU जैसे संस्थान इसी रेंज में आते हैं |
| अच्छे राज्य सरकारी कॉलेज (महानगरों में) | 650 – 680 | 1000 – 10000 | राज्य कोटा में रैंक अधिक महत्वपूर्ण होती है |
| सामान्य राज्य सरकारी कॉलेज | 620 – 650 | 10000 – 25000 | अधिकांश राज्यों में इस रेंज में कॉलेज उपलब्ध |
| सीमित सीट वाले दूरस्थ क्षेत्र के कॉलेज | 600 – 620 | 25000 – 50000 | राज्य की कटऑफ के अनुसार भिन्न हो सकता है |
नीट में कितने नंबर पर सरकारी कॉलेज मिलेगा?
इसे हम चरण दर चरण समझाने का प्रयास करते हैं। चलिए शुरू करते हैं।
- सबसे पहले तो आपको नीट का फॉर्म भरना होगा। उसके तहत NTA आपका नीट एग्जाम कंडक्ट करवाएगा और आपको पूरी तैयारी के साथ वह देना होगा।
- अब NTA के द्वारा नीट का रिजल्ट निकाला जाएगा और उसके अनुसार आपको पासिंग मार्क्स, कट ऑफ नंबर व रैंक दी जाएगी।
- अब यह पासिंग मार्क्स तो सभी के एक समान होते हैं लेकिन एक स्टूडेंट को रैंक 4 तरह की दी जाती है।
- सबसे पहले रैंक उसकी All In India (AIQ) रैंक होती है तो वहीं दूसरी उसकी अपनी जाति के अनुसार AIQ होती है।
- तीसरी रैंक उसके राज्य के कुल स्टूडेंट्स के अनुसार रैंक होती है तो चौथी रैंक उसके राज्य में जाति के अनुसार उसकी रैंक होती है।
- ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि सेंट्रल और स्टेट मेडिकल कॉलेज में राज्य और स्टूडेंट्स की जाति के अनुसार सीट्स आरक्षित होती है।
- अब जब आपको NTA के द्वारा नंबर और रैंक दे दी जाती है तो शुरू होता है MCC और स्टेट MCC का काम।
- MCC की ऑफिसियल वेबसाइट में आप काउंसलिंग के लिए आवेदन करते हैं तो साथ के साथ स्टेट की एमसीसी में भी आवेदन करना होता है।
- इसमें आपको अपनी प्रेफेरेंस और रैंक को ध्यान में रखकर सभी कॉलेज को क्रमानुसार भरना होता है। देशभर में लगभग 400 मेडिकल कॉलेज हैं। आप इसमें से सभी को या कुछ चुनिंदा को क्रमानुसार भर सकते हैं।
- अब जो सेंट्रल मेडिकल कॉलेज होते हैं, उसमें 100 प्रतिशत सीट्स पर काउंसलिंग सेंट्रल एमसीसी ही करती है और किसी भी राज्य का स्टूडेंट इसमें जा सकता है। हालाँकि सीट्स के लिए स्टूडेंट्स की जाति को अवश्य देखा जाता है।
- वहीं जो राज्य स्तर के मेडिकल कॉलेज हैं, उस पर 85 प्रतिशत सीट्स पर काउंसलिंग स्टेट एमसीसी करता है तो बाकी 15 प्रतिशत सीट्स पर सेंट्रल एमसीसी करता है।
- कहने का मतलब यह हुआ कि स्टेट के सभी मेडिकल कॉलेज पर उसी राज्य की काउंसलिंग कमेटी 85 परसेंट सीट्स पर स्टूडेंट्स को एडमिशन दिलवाती है तो बाकी 15 परसेंट पर सेंट्रल मेडिकल काउंसलिंग कमेटी।
- इसे आप इस तरह से भी समझ सकते हैं कि मध्य प्रदेश के किसी राज्य स्तर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में कुल 100 सीट है तो उसमें मध्य प्रदेश राज्य के ही 85 स्टूडेंट्स लिए जाएंगे जो स्टेट एमसीसी चुनेगी तो वहीं 15 स्टूडेंट्स मध्य प्रदेश सहित पूरे देश के किसी भी राज्य से हो सकते हैं जिन्हें सेंट्रल एमसीसी चुनती है।
- इसी कारण हर स्टूडेंट की राज्य स्तरीय कट ऑफ भी अलग निकलती है। वह इसलिए क्योंकि हर राज्य में नीट का एग्जाम देने वाले स्टूडेंट्स, उसमें पास होने वाले स्टूडेंट्स, वहाँ के मेडिकल कॉलेज में कुल खाली सीट इत्यादि अलग-अलग होती है।
- हर स्टूडेंट को अपनी रैंक और कट ऑफ मार्क्स के हिसाब से सरकारी मेडिकल कॉलेज मिलता है। ऐसे में सभी स्टूडेंट्स को बहुत ही ध्यान से काउंसलिंग में भाग लेना होता है और कॉलेज के क्रम चुनने होते हैं।
यह प्रक्रिया पेचीदा जरुर है क्योंकि इसमें केंद्र और राज्य स्तर पर मेडिकल कॉलेज का वर्गीकरण किया गया है। बहुत से स्टूडेंट्स इस प्रक्रिया को सही भी नहीं मानते हैं क्योंकि कुछ राज्यों में मेडिकल सीट पर बहुत ज्यादा कम्पटीशन देखने को मिलता है तो कुछ में बहुत कम।
उदाहरण के तौर पर केरल राज्य में कम्पटीशन बहुत कम है तो वहीं राजस्थान में बहुत ज्यादा है। जहाँ कुछ राज्यों में जनरल श्रेणी के लिए नीट की कट ऑफ 640 नंबर से ऊपर चली जाती है तो कुछ राज्यों में यह 580 के आसपास रहती है। हालाँकि यदि आप जनरल श्रेणी में आते हैं तो आपको 600 से ऊपर नंबर और आरक्षित श्रेणी वालों को 550 से ऊपर नंबर स्कोर करने पर ध्यान देना चाहिए।
नीट में पास होने के लिए कितने नंबर चाहिए?
अब बात करते हैं नीट में पासिंग मार्क्स के बारे में। अभी तक तो आपने जाना कि नीट में सरकारी मेडिकल कॉलेज के लिए कितने नंबर चाहिए या क्या कट ऑफ रहती है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कट ऑफ से कम नंबर पाने वाले स्टूडेंट्स नीट एग्जाम में फेल हो जाते हैं। दरअसल नीट एक फार्मूला के तहत पासिंग मार्क्स भी निकालती है जिसे Minimum Qualifying Percentile कहा जाता है।
अभी तक आपने परसेंटेज के बारे में सुन रखा होगा लेकिन यह परसेंटाइल इससे अलग होती है। इसके लिए एक फार्मूला बनाया गया है, जो कि इस प्रकार है:
नीट में Minimum Qualifying Percentile = (आपके टोटल नंबर * 100) / टॉप करने वाले स्टूडेंट के मार्क्स
अब इसे एक उदाहरण से समझ लेते हैं। मान लीजिए कि नीट का एग्जाम 100 नंबर का होता है और उसमें आपके 45 नंबर आए हैं। इस हिसाब से आपके परसेंट तो 45 प्रतिशत बने लेकिन नीट में प्रतिशत कोई मायने नहीं रखते और इसके लिए परसेंटाइल ही मायने रखती है। तो ऊपर दिए गए फार्मूला के अनुसार हमें टॉप स्टूडेंट के मार्क्स जानने हैं। तो मान लीजिए जिस स्टूडेंट ने टॉप किया है, उसने नीट में 100 में से 90 नंबर लिए हैं। तो फार्मूला लगाकर देखते हैं।
(45 * 100) / 90 = 4500 / 90 = 50
तो इस तरह से आपने देखा कि आपके परसेंट तो 45 थे लेकिन टॉप स्कोर करने वाले स्टूडेंट के हिसाब से आपके परसेंटाइल 50 हो गए। अब यदि वह स्टूडेंट 100 में से 100 नंबर लेकर आता है तो आपके परसेंटाइल 45 होते। इसी तरह नीट में मिलने वाले पासिंग मार्क्स अर्थात परसेंटाइल टॉप स्टूडेंट के द्वारा स्कोर किए गए मार्क्स पर निर्भर करते हैं।
अब यह पासिंग मार्क्स भी जातियों के आधार पर होते हैं। जनरल कैटेगरी वाले स्टूडेंट्स को न्यूनतम 50 परसेंटाइल, जनरल विकलांग को 45 परसेंटाइल, अन्य सभी आरक्षित वर्ग व उसके तहत आने वाले विकलांगों को 40 परसेंटाइल लाने होते हैं।
इसलिए यदि आप जल्द से जल्द नीट में अपना सिलेक्शन करवाना चाहते हैं और वह भी अच्छे मार्क्स के साथ तो आपका टॉप लेवल के नीट कोचिंग सेंटर में पढ़ना बहुत जरुरी हो जाता है। मैट्रिक्स सीकर, आकाश दिल्ली, एलन कोटा जैसे इंस्टीट्यूट इस मामले में आपको सही गाइडेंस और स्टडी मटेरियल देते हैं। मैट्रिक्स में तो इसके लिए अलग से डाउट सेंटर भी बनाए गए हैं जहाँ स्टूडेंट्स किसी भी समय जाकर अपने डाउट क्लियर कर सकते हैं।
महत्वपूर्ण सलाह
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राज्य कोटा का लाभ उठाएं: यदि आपका राज्य कम प्रतिस्पर्धी है, तो राज्य कोटा क्वॉटा के तहत बेहतर कॉलेज मिलने की संभावना अधिक है।
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सटीक चॉइस फिलिंग: काउंसलिंग में सफलता का 50% यही निर्भर करता है। पिछले वर्षों की कटऑफ का अध्ययन करके ही चॉइस भरें।
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आरक्षण का ध्यान रखें: अपनी श्रेणी (जनरल/OBC/SC/ST/EWS) के अनुसार ही कटऑफ देखें और चॉइस भरें।
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NEET 2026 की तैयारी: उपरोक्त लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए, एक मजबूत कोचिंग संस्थान (जैसे सीकर में मैट्रिक्स अकैडमी और गुरुकृपा, दिल्ली में आकाश, या कोटा में एलन) से मार्गदर्शन लें। इन संस्थानों की नियमित टेस्ट सीरीज और NCERT आधारित शिक्षण पद्धति आपको लक्ष्य तक पहुँचने में सहायक सिद्ध होगी।
निष्कर्ष:
इन्हें भी पढ़ें:
- नीट 2025 एग्जाम पैटर्न व सिलेबस
- सीकर में नीट के बेस्ट कोचिंग सेंटर
- टॉप मेडिकल कॉलेज इन इंडिया
- नीट एग्जाम क्या होता है?
- नीट का एग्जाम कौन दे सकता है?


