Gurukripa or CLC Sikar | सीएलसी या गुरुकृपा सीकर | SCAS

सीकर शहर में एक नहीं बल्कि सैकड़ों कोचिंग इंस्टीट्यूट आईआईटी और नीट की तैयारी करवाने में दिन रात लगे हुए हैं। जिस प्रकार पहले पूरे भारतवर्ष में कोटा शहर का डंका बजता था, आज उसकी टक्कर में सीकर शहर भी आ खड़ा हुआ है। यह किसी और की बदौलत नहीं बल्कि सीकर शहर में चल रहे सैकड़ों इंस्टीट्यूट के कारण ही है जो दिन रात बच्चों का भविष्य बनाने के लिए मेहनत कर रहे हैं।

उन्हीं में से दो प्रसिद्ध इंस्टीट्यूट के नाम हैं सीएलसी और जीसीआई (Gurukripa or CLC Sikar) जिनका पूरे सीकर शहर में ही डंका बजता है। इसमें हम सीएलसी को करियर लाइन कोचिंग के नाम से जानते (CLC vs GCI Sikar) हैं तो वहीं जीसीआई को गुरुकृपा करियर इंस्टीट्यूट के नाम से। अब दिक्कत तब आती है जब हम भी आईआईटी और नीट की तैयारी करना चाहते हो लेकिन सीएलसी और जीसीआई में से कौन सा इंस्टीट्यूट ज्यादा बढ़िया है, यह पक्का नहीं हो पाता है।

अब नाम तो गुरुकृपा और करियर लाइन कोचिंग दोनों का ही प्रसिद्ध है लेकिन जब किसी एक को चुनने की बारी आती है तो हम मात खा जाते हैं। ऐसे में आज के इस लेख में हमने गुरुकृपा और सीएलसी के बीच एक तुलनात्मक अध्ययन किया है जिसके बारे में आपका जानना जरुरी है। तो आइये जाने सीएलसी और गुरुकृपा में से कौन सा बेहतर है जिसमें आपको जाना चाहिए।

जीसीआई या सीएलसी: कौन है बेहतर?

आप जब सीकर शहर में नीट और आईआईटी की कोचिंग लेने जाते (CLC vs GCI Sikar) हैं तो मन में एक अजीब सी बेचैनी होती है। वह इसलिए क्योंकि वहां पहले से ही लाखों छात्र आईआईटी और नीट की तैयारी करने में दिन रात लगे होते हैं जबकि सीट कुछ हज़ार ही होती है। ऐसे में जब आप वहां पहुँचते हैं और वहां अपने आसपास हजारों बच्चों को आईआईटी और नीट के exams के बारे में बात करते हुए और उनके question solve करते हुए देखते हैं तो मन में बेचैनी उठना लाजमी है।

आपके मन में यह बात आने लगती है कि क्या आपका आईआईटी और नीट की परीक्षा में चयन हो पायेगा या नहीं या आप केवल सीकर शहर में ही कोचिंग लेते रह जाएंगे। ऐसे में यदि आपको जल्द से जल्द आईआईटी और नीट की परीक्षा में अपना चयन करवाना है और बढ़िया कॉलेज में पढ़ने जाना है तो आपका मन तो पक्का होना जरुरी है ही लेकिन उसी के साथ ही एक सही इंस्टीट्यूट का चुनाव किया जाना भी बहुत मायने रखता है।

वह इसलिए क्योंकि एक सही इंस्टीट्यूट आपका सही दिशा में सही से मार्गदर्शन कर सकता है। वहां आपको सही ट्रेनिंग मिलती है, बेस्ट फैकल्टी से पढ़ने को मिलता है, अच्छे से एनालाइज किया हुआ कोर्स मिलता है। यह सभी चीजें मिलकर ही आपको तेजी से आगे बढ़ने और आईआईटी और नीट की परीक्षा में चयन करवाने में सहायता करती है। ऐसे में गुरुकृपा और सीएलसी दोनों ही बढ़िया इंस्टीट्यूट हैं लेकिन जब एक को चुनने की बारी आती है तो अवश्य ही हर किसी का शंका में पड़ जाना लाजमी है।

ऐसे में हमने भी आपकी इस परेशानी को समझा और इसके लिए JEE और NEET दोनों को अलग अलग कर जीसीआई और सीएलसी के बीच में तुलनात्मक अध्ययन किया। अब जेईई का एग्जाम अलग होता है जबकि नीट का एग्जाम अलग होता है। साथ ही दोनों की कोचिंग में भी बहुत फर्क देखने को मिलता है। तो आइये जाने गुरुकृपा और करियर लाइन कोचिंग का दोनों की ही कोचिंग में हाल।

JEE के लिए गुरुकृपा या सीएलसी: कौन है बेहतर?

अब अगर हम आईआईटी की बात करेंगे तो सीकर शहर में सबसे ज्यादा बच्चे इसी की कोचिंग लेने ही आते (CLC vs Gurukripa for JEE) हैं। दरअसल हर किसी की यह आशा होती है कि वह देश के टॉप लेवल के आईआईटी कॉलेज में प्रवेश पा लें और साथ ही अपने चुनिंदा कोर्स में। अब किसी किसी को अपने लेवल का IIT मिल भी जाता है लेकिन उसका उस इंजीनियरिंग कोर्स में चयन नहीं हो पाता है जिसमें वह लेना चाहता था। ऐसे में उसे ना चाहकर भी उसे छोड़ना पड़ता है।

तो इसमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है आपके द्वारा आईआईटी की परीक्षा में लिए गए नंबर और फॉर्म में कॉलेज व कोर्स को लेकर भरी गयी पसंद। ऐसे में यदि आपको सीकर शहर में गुरुकृपा या सीएलसी में से किसी एक इंस्टीट्यूट को आईआईटी की कोचिंग लेने के लिए चुनना है तो हम कहेंगे कि दोनों में कुछ ज्यादा अंतर नहीं है। वह इसलिए क्योंकि दोनों के ही बीच इसे लेकर कड़ी टक्कर देखने को मिलती है। कभी गुरुकृपा सीएलसी से आगे निकल जाता है तो कभी सीएलसी आगे हो जाता है।

यदि हम अभी की बात करें तो इस लिस्ट में सीएलसी गुरुकृपा से बेहतर कर रहा है। जब हमने सीकर के टॉप 5 आईआईटी इंस्टीट्यूट की लिस्ट देखी तो उसमें पाया कि करियर लाइन कोचिंग का स्थान पांचवें नंबर पर था जबकि गुरुकृपा उस लिस्ट में था ही नहीं। इसके बाद हमने सीकर के टॉप 10 सीएलसी इंस्टीट्यूट की लिस्ट खंगाली तो फिर हमें गुरुकृपा छठे स्थान पर नज़र आया। इस तरह से दोनों के बीच कुछ ज्यादा अंतर नहीं है और कभी सीएलसी छठे पर चला जाता है तो कभी गुरुकृपा पांचवें स्थान पर आ जाता है।

नीट के लिए गुरुकृपा या सीएलसी: कौन है बेहतर?

अब हमने आईआईटी की तो बात कर ली लेकिन जब नीट की कोचिंग देने की बात आती (Gurukripa vs CLC for NEET) है तो स्थितियां एकदम उलट जाती है। नीट की जो कोचिंग होती है वह सामान्यतया आईआईटी की कोचिंग से बहुत अलग और मुश्किल मानी जाती है। वह इसलिए क्योंकि यह भविष्य के डॉक्टर होते हैं और इन्हें ऐसे ही सेलेक्ट नहीं किया जा सकता है। इसके लिए उन्हें पहले नीट की बहुत ही मुश्किल परीक्षा से गुजरना होता है और उसके बाद अगले कई वर्षों तक कड़ी मेहनत करनी होती है।

ऐसे में जो गुरुकृपा सीएलसी से आईआईटी की कोचिंग देने में पिछड़ रहा था वही अब नीट की कोचिंग देने में उससे आगे निकल जाता है। कहने का अर्थ यह हुआ कि यदि आप सीकर शहर में नीट की कोचिंग लेने जा रहे हैं तो फिर आपको सीएलसी की बजाये जीसीआई को चुनना चाहिए क्योंकि वहां इसके लिए बेस्ट कोचिंग दी जाती है। ऐसे में हमने जब सीकर के टॉप 5 नीट इंस्टीट्यूट के बारे में रिसर्च की तो आश्चर्यजनक रूप में उसमें गुरुकृपा का स्थान दूसरा था।

ऐसे में यह कहना एकदम सही रहेगा कि आपको सीकर शहर में नीट की कोचिंग गुरुकृपा से बहुत सही मिलेगी और आपका सलेक्शन होने की संभावना भी बढ़ जाएगी। वहीं इस सूची में सीएलसी का स्थान पहले की तरह ही पांचवां था। ऐसे में आपको सीएलसी नीट की कोचिंग देने में गुरुकृपा से बहुत नीचे मिलेगा। तो आप आँख बंद करके सीएलसी की बजाये जीसीआई को नीट की कोचिंग देने के लिए चुन सकते हैं।

निष्कर्ष

यहाँ आपने जाना कि जीसीआई और सीएलसी में से आईआईटी और नीट की कोचिंग देने में अलग अलग रूप में कौन बेहतर है। जहाँ गुरुकृपा को नीट की कोचिंग देने में सीएलसी इंस्टीट्यूट से बेहतर माना गया तो वहीं सीएलसी में आईआईटी की कोचिंग जीसीआई से बेहतर रूप में दी जा रही है। हालाँकि आपने इसी के साथ ही यह भी जाना कि यह दोनों ही इंस्टीट्यूट सीकर शहर के नंबर एक इंस्टीट्यूट नहीं हैं और वहां कोई अन्य इंस्टीट्यूट आईआईटी और नीट की बेस्ट तैयारी करवा रहा है।

ऐसे में उस इंस्टीट्यूट के बारे में जानना भी आपका हक़ है ताकि आप उसी के अनुसार ही अपना निर्णय लेने में सक्षम हो सकें। तो सीकर के उस नंबर एक इंस्टीट्यूट का नाम है वहां का मैट्रिक्स कोचिंग सेंटर (Matrix Academy Sikar)। अब आप सोच रहे होंगे कि यह मैट्रिक्स अकैडमी आईआईटी की बेस्ट तैयारी करवाती है या फिर नीट की। तो आपको जानकर आश्चर्य होगा कि आईआईटी और नीट दोनों की ही कोचिंग देने में मैट्रिक्स इंस्टीट्यूट सीकर का टॉप लेवल का इंस्टीट्यूट बना हुआ है।

ऐसा मैट्रिक्स अकैडमी में वर्ल्ड क्लास सुविधाएँ, बेस्ट और अनुभवी फैकल्टी स्टाफ, जगह जगह डाउट सेंटर, छात्रों के लिए 365 दिन खुले रहने इत्यादि के कारण है। अब छात्रों को एक ही जगह सब तरह की सुविधाएँ और उत्तम मार्गदर्शन मिल रहा है तो अवश्य ही वहां का आईआईटी और नीट का रिजल्ट भी सबसे बेस्ट ही रहेगा। तो वैसा ही कुछ मैट्रिक्स इंस्टीट्यूट के साथ है जो इसे सीकर का टॉप आईआईटी और नीट इंस्टीट्यूट बनाता है।

इसलिए यदि आपको चाहे IIT की तैयारी करनी हो या मेडिकल की, और उसके लिए आपको सीकर का बेस्ट इंस्टीट्यूट चुनना है तो मैट्रिक्स अकैडमी गुरुकृपा और करियर लाइन कोचिंग दोनों से ही बेहतर अकैडमी मानी जाती है। इसका परिणाम आप हर वर्ष आने वाले इंजीनियरिंग और मेडिकल परीक्षाओं के परिणाम से भी देख सकते हैं जिसमें मैट्रिक्स में पढ़ रहे छात्र पूरे सीकर शहर में ही टॉप करते हैं। यहाँ तक कि वहां के बच्चे सबसे ज्यादा चयनित भी होते हैं। तो आपने इस बारे में क्या सोचा है? नीचे कमेंट करके हमें अवश्य बताइयेगा।

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Kota Suicide News Today in Hindi | कोटा स्टूडेंट्स सुसाइड | SCAS

कोटा को देश की कोचिंग सिटी कहा जाता था किन्तु अब यह कोचिंग सिटी के नाम से कम और छात्रों के सुसाइड पॉइंट के नाम से ज्यादा न्यूज़ में फेमस हो रहा (Kota Suicide News Today in Hindi) है। आये दिन किसी ना किसी छात्र के कोटा में सुसाइड करने के केसेज न्यूज़ में सुनने को मिल रहे हैं। माता-पिता बहुत ही उम्मीदों के साथ अपने प्यारे से बच्चे को कोटा भेजते (Suicides Rising in Kota) हैं और इसके लिए उन्हें बहुत खर्चा भी करना पड़ता है।

वहीं दूसरी ओर, एक छात्र भी अपने मन में कई तरह की जिज्ञासा लेकर घर से इतनी दूर कोचिंग सिटी कोटा में पढ़ने आता है ताकि उसका जल्द से जल्द देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी या कॉलेज में एडमिशन हो जाये। ताकि वह आगे चल कर अच्छी नौकरी कर (Kota Students Suicide) सके और अपना और अपने माता-पिता का भविष्य उज्जवल बना सके। ऐसे में आखिरकार इसकी क्या वजह है कि लगातार हमें यह केस सुनने में आ रहे हैं कि कोटा में फलाना छात्र ने इस कारण से सुसाइड कर लिया तो फलाना छात्र फंदे से लटकता हुआ मिला।

कोटा में छात्र क्यों कर रहे हैं सुसाइड?

अब कोटा किस चीज़ के लिए देशभर में इतना प्रसिद्ध है? सबसे पहले इसी को जानने की ही कोशिश करते हैं क्योंकि यदि हमने नब्ज पकड़ ली तो शायद यह पता चल जाये कि आखिरकार बच्चे कोटा में ही क्यों सुसाइड कर रहे (Kota Students Suicide) हैं। अब यह तो सभी को पता है कि कोटा में छात्र कोचिंग लेने जाते हैं लेकिन यह कोचिंग किस चीज़ की है। तो उसका जवाब है JEE और NEET की ताकि उनका देश के टॉप लेवल के IIT या मेडिकल कॉलेज में एडमिशन हो सके।

अब क्या इस तरह की कोचिंग केवल कोटा में ही करवायी जाती है? यदि आप अपने शहर में या छोटे से कस्बे में भी जाएंगे तो वहां आपको JEE और NEET की तैयारी करवाने वाले दर्जनों इंस्टीट्यूट और कोचिंग संस्थान दिख जाएंगे। तो फिर आपके शहर या गाँव में कोचिंग ले रहे छात्र सुसाइड नहीं कर रहे हैं जबकि कोटा में कर रहे हैं, भला ऐसा क्यों है (Kota me suicide kyu ho rhe h)!!

अब कुछ लोग कहेंगे कि कोटा में देश के प्रतिष्ठित और टॉप लेवल के कोचिंग इंस्टीट्यूट हैं जहाँ से सबसे ज्यादा सलेक्शन IIT और NEET में हो रहे हैं। तो यह भी गलत है। हां, यह बात तो सही है कि आज कोटा देशभर में IIT और NEET की कोचिंग देने में टॉप पर आ चुका है लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि भारत में किसी अन्य शहर में अच्छे इंस्टीट्यूट नहीं है या उसकी टक्कर में भी नहीं है।

अब कोटा राजस्थान शहर में है और हम कोटा के पास का ही राजस्थान का एक अन्य शहर सीकर ले लें तो यह आज के समय में कोटा को कड़ी टक्कर दे रहा है। जिस तरह से कोटा में एलन इंस्टीट्यूट का डंका बजता है तो उसी तरह से सीकर का मैट्रिक्स इंस्टीट्यूट भी कम नहीं है। वहीं सीकर शहर के जैसे ही कोटा को टक्कर देने के लिए दिल्ली, हैदराबाद, जयपुर के इंस्टीट्यूट भी कम नहीं हैं। फिर कोटा में ही सुसाइड हो रहा है लेकिन अन्य शहरों में नहीं। आइये इसके कारणों के बारे में जान लेते हैं।

कोटा में क्यों बढ़ रही स्टूडेंट्स की खुदकुशी की घटना?

भारत के हर शहर और गाँव में IIT या नीट की कोचिंग दी जाती (Suicides Rising in Kota) है लेकिन वहां सुसाइड नहीं होते किन्तु कोटा में हर आये दिन कोई ना कोई छात्र फंदे से लटक कर ख़ुदकुशी कर लेता है या किसी ऊँची बिल्डिंग से छलांग मार जाता है या कुछ और। ऐसे में कोटा के स्टूडेंट्स ही खुदकुशी कर रहे हैं, कहीं और के नहीं, आइये इसके बारे में पता लगाया जाये और इसके कारणों पर गौर किया जाए।

  • कोटा का हाइप

कोटा में स्टूडेंट्स के खुदकुशी करने में जिस चीज़ की सबसे बड़ी भूमिका है वह है कोटा का हाइप हो जाना। अब पूरे देश के लोग यही मान बैठे हैं कि उनके बच्चे को कोटा से अच्छी कोचिंग कहीं और मिल ही नही सकती है। माना कि कोटा में छात्रों का सलेक्शन रेट बहुत ज्यादा है लेकिन आप यह भी तो देखिये कि वहां छात्रों की संख्या भी तो कितनी है।

साथ ही वहां ज्यादातर ऐसे छात्र भी आते हैं जो पढ़ाई को लेकर सीरियस होते हैं और इसी कारण उनका जल्दी सलेक्शन हो जाता है। किन्तु आपको भारत के अन्य शहरों में या अपने घर के पास के ही किसी इंस्टीट्यूट में ही अच्छी कोचिंग मिल सकती है, बस आपका सीरियस होना जरुरी है और किसी अच्छे इंस्टीट्यूट के बारे में सही रिसर्च किया जाना।

  • इंस्टीट्यूट का प्रेशर

अब यह कारण भी पहले वाले कारण से ही जुड़ा हुआ है। हम समझाते हैं कैसे, आप सभी के सामने जब भी कोटा का नाम आता है तो आपके मन में सबसे पहले यही आता है कि वह कोचिंग सिटी है जहाँ छात्र IIT और नीट की कोचिंग लेने के लिए जाते हैं। तो अब छात्र वहां जाकर पढ़ते कहाँ हैं? आपका उत्तर होगा कोटा में चल रहे सैकड़ों इंस्टीट्यूट में से किसी एक में।

ऐसे में कोटा के सभी इंस्टीट्यूट में एक दूसरे से आगे निकलने की एक होड़ सी मची हुई है। ऐसे में सभी इंस्टीट्यूट अपना रिजल्ट अच्छा दिखाने के लिए और दूसरे इंस्टीट्यूट से बेहतर दिखने के लिए अपने यहाँ पढ़ रहे छात्रों पर बहुत ज्यादा दबाव डालते हैं। अब कई छात्र ऐसे होते हैं जो इतने ज्यादा दबाव को झेल नहीं पाते हैं और आखिर में जाकर सुसाइड कर लेते हैं।

  • चारों और स्टूडेंट्स का होना

भारत देश में कोटा के अलावा भी कई कोचिंग सिटी है जहाँ पर JEE और NEET की बहुत अच्छी तैयरी करवायी जाती है। जैसे कि सीकर, दिल्ली, जयपुर, हैदराबाद इत्यादि। किन्तु कोटा के साथ दिक्कत यह है कि उनके पूरे शहर को ही कोचिंग सिटी में बदल कर रख दिया गया है। वहां आज के समय में दर्जनों या सैकड़ों नहीं बल्कि हजारों कोचिंग सेंटर खुल चुके हैं।

अब इतने कोचिंग सेंटर खुल गए हैं तो अवश्य ही वहां लाखों छात्र भी पढ़ रहे होंगे। साथ ही लोगों ने बड़े-बड़े हॉस्टल बना रखे हैं और इसी के साथ ही वहां का हर दूसरा घर पीजी की सुविधा देता है। ऐसे में आप कोटा में कहीं भी चले जाएं, वहां आपको आम लोग कम बल्कि IIT या NEET की कोचिंग ले रहे स्टूडेंट्स ज्यादा दिखेंगे। ऐसे में पूरा समय बस स्टूडेंट्स से घिरे रहने के कारण भी छात्र का दिमाग घुम जाता है।

  • तनाव दूर करने को कुछ नहीं

अब कोटा ने अपने शहर को स्टूडेंट्स के पढ़ने के लिए तो अच्छे से विकसित कर लिया लेकिन उन्हीं स्टूडेंट्स के शारीरिक व मानसिक विकास के लिए रत्ती भर भी मेहनत नहीं की। ना इसके लिए कोटा के प्रशासन ने कुछ देखा, ना लोगों ने और ना वहां कोचिंग दे रहे हजारों इंस्टीट्यूट ने। बस सभी का उद्देश्य एक ही था कि किस तरह से स्टूडेंट्स को IIT और NEET की बेस्ट से बेस्ट कोचिंग दी जाए।

अब सभी का फोकस केवल कोचिंग देने पर ही है तो बाकि पर ध्यान किसका ही जाएगा। अब आप ही सोचिये कि हम भी एक ही काम दिन रात करके थक जाते हैं और दिमाग काम करना बंद कर देता है या थक जाता है। इस कारण हमें तनाव होने लगता है। अब यदि तनाव को दूर करने के लिए कुछ हो ही ना तो यह तनाव बढ़ता चला जाता है और डिप्रेशन का रूप ले लेता है। इसी डिप्रेशन में स्टूडेंट्स सुसाइड कर लेते हैं।

  • माता-पिता का नहीं समझना

कोटा में आज भी हजारों छात्र डिप्रेशन में दिन रात रह रहे हैं और पता नहीं कब वे कोई गलत कदम उठा लें। अब इनमें से बहुत से छात्र अपने माता-पिता को सीधा कह नहीं पाते हैं क्योंकि वे डरते हैं या हिचकिचाते हैं। कुछ कह भी देते हैं तो उनके माता-पिता समझते नहीं हैं या उन्हें कुछ और कहकर बहला फुसला देते हैं।

ऐसे में माता या पिता में से किसी एक का समझना बहुत ही ज्यादा जरुरी है। स्टूडेंट्स के पेरेंट्स अगर उन्हें समझेंगे और उसके लिए कुछ करेंगे तो बहुत कुछ बदल सकता है। हम यह नहीं कह रहे हैं कि वे अपने बच्चे की पढ़ाई छुड़वा दें या उन्हें IIT और NEET की कोचिंग ना दें। क्या पता, आप उन्हें किसी अन्य अच्छे शहर या कोचिंग इंस्टीट्यूट में लगाकर IIT या NEET की कोचिंग दिलवा सकते हैं। इससे आपका काम भी बन जाएगा और आपका बच्चा भी बच जाएगा।

निष्कर्ष

सौ पते की एक बात, कोटा ही एकमात्र विकल्प नहीं है जहाँ जाकर आप अपना भविष्य बना सकते हैं। देशभर में ऐसे दर्जनों शहर में सैकड़ों इंस्टीट्यूट हैं जो कोटा के कई बड़े बड़े इंस्टीट्यूट से भी बेहतर रिजल्ट दे रहे हैं। जैसे कि हमने आपको ऊपर ही बताया कि कोटा से बस कुछ दूर ही राजस्थान के एक अन्य शहर सीकर में मैट्रिक्स अकैडमी में बहुत ही अच्छी कोचिंग दी जाती है। आप वहां अपने बच्चे को भेजकर देख सकते हैं। ऐसे में निर्णय आपको ही लेना है और वो भी जल्द से जल्द।

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